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पोषक तत्व का संतुलन | Balance Nutrient Protection of Insect - Blog 21

|| पोषक तत्वों का संतुलन ||

50 प्रमुख फसलों के रोग | some important crop disease in hindi - Blog 22

1- खेरा रोग है - धान का 2 - लाल सड़न रोग है - गन्ने का 3 - करनाल बंट रोग है - गेहूँ का 4 - श्वेत फफोला रोग है - सरसों का 5 - पनामा सूखा रोग है - केले का 6 - अर्गट रोग है - बाजरा का 7 - उक्ठा रोग है - चने का 8 - टिक्का रोग है - मूँगफली का 9 - ब्लेक आर्म रोग है - कपास का 10 - केंकर रोग है - नीम्बू का 11 - ईयर कोकल रोग है - गेहूँ का 12 - कोयलिया रोग है - आम का 13 - फाइलोडी रोग है - तिल का 14 - टूंगरू रोग है - धान का 15 - पीत शिरा रोग है - भिंडी , पपीता , तम्बाकू 16 - हेन व चिकन रोग है - अंगूर का 17 - बक आई रोट रोग है - टमाटर का 18 - ग्रासी शूट रोग है - गन्ने का 19 - मोल्या रोग है - गेहूँ और जौ का 20 - चुर्णिल फफूंद रोग है - मटर का 21 - हरित बाली रोग है - बाजरा का । यहाँ पर 50 प्रमुख फसलों और उनके सामान्य रोगों की सूची हिंदी में दी गई है। यह जानकारी किसान भाइयों को उनकी फसलों की सुरक्षा के लिए मददगार होगी। 🌾 50 प्रमुख फसलों के रोग – हिंदी में सूची क्र. फसल का नाम रोग का नाम 1 गेहूँ कंडुआ (स्मट), झुलसा रोग 2 धान झुलसा रोग, ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट 3 मक्क...

निरोग स्वास्थ्य चालीसा - Blog 20

निरोग स्वास्थ्य चालीसा   पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात! सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!! धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार! दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!! ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर! कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!! प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप! बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!! ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार! करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!! भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार! चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!! प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस! सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!! प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार! तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!! भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार ! डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !! घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर! एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!! अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास! पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!! रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय! सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!! सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश! भो...

जैविक खेती के फायदे | Benefits of organic farming - Blog 19

कृषकों की दृष्टि से लाभ:        1. भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है। 2. सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है। 3. रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है। 4. फसलों की उत्पादकता में वृद्धि। मिट्टी की दृष्टि से: 1. जैविक खाद के उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है। 2. भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती हैं। 3. भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होगा। पर्यावरण की दृष्टि से: 1. भूमि के जल स्तर में वृद्धि होती है। 2. मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण मे कमी आती है। 3. कचरे का उपयोग, खाद बनाने में, होने से बीमारियों में कमी आती है। 4. फसल उत्पादन की लागत में कमी एवं आय में वृद्धि 5. अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्पर्धा में जैविक उत्पाद की गुणवत्ता का खरा उतरना। जैविक खेती, की विधि रासायनिक खेती की विधि की तुलना में बराबर या अधिक उत्पादन देती है अर्थात जैविक खेती मृदा की उर्वरता एवं कृषकों की उत्पादकता बढ़ाने में पूर्णत सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। ज...

ट्राइकोडर्मा अब घर पर कैसे बनाइये | tricodarma verdi - Blog 18

ट्राईकोडर्मा बनाने की विधि: एक बर्तन में १० लीटर ताजा पानी भरना है, इस पानी को गरम करना है, पानी गरम करते समय इसमें ५०  ग्राम गुड या १०० मिली दूध मिला दें , जब पानी में उबाल आने लगे इसे बाजू में ठंडा होने के लिए रख दें, पानी ठंडा हो जाने पर इसमें १०० मिली ट्राइकोडर्मा के साथ निमेटोड कंट्रोल करने वाला उत्पादन मिलाकर किसी प्लास्टिक के ड्रम में डालकर  ठक्कन को प्लास्टिक लगाकर बंद करें, मतलब उसमें बाहर की हवा ना जा सके ! दूसरे दिन सुबह इस ठक्कन को खोलकर किसी स्वच्छ लकड़ी से इस पानी को हलाएं, फिर ठक्कन बंद करें, ऐसा आप आठ दिन तक करें, ठंडी के दिनों में इस ड्रम को हलकी धुप आती हो ऐसी जगह पर रखें, बाकी महीनों में आप कहीं भी छाव में रख सकते है, ज्यादा ठन्डे मौसम में आपको धुप में रखना पड़ेगा अन्यथा जीवाणुओं की ग्रोथ नहीं होगी | ऐसा करने से जो उत्पादन आपने १०० मिली डाला था अब आपके पास १० लीटर बन गया है, आप २०० लीटर पानी में १ लीटर डालकर बहते पानी के साथ खेत में दे सकते है, या टपक पद्धत के माध्यम से दे सकते है | यह उत्पादन बार-बार देने से भी कोई नुकसान नहीं फायदा ही होगा, रासायनिक खादो...

जमीन की ज्यादा जुताई करने से नुकसान | Heavy ploughing - Blog 17

जमीन की ज्यादा जुताई करने से नुकसान - १. जमीन की ज्यादा जुताई करने से ऊपर २ इंच की उपजाऊ मिट्टी जमीन के अंदर चली जाती है। २.खेत मे बार -बार ट्रेक्टर चलाने व जुताई करने से मिट्टी निचे दबती जाती है, मिट्टी कठोर हो जाती है । ३.मिट्टी के बीच खाली जगह कम हो जाती है, जिससे मिट्टी की जलधारण क्षमता कम हो जाती है। ४.केचुओ द्वारा मिट्टी मे निर्मित केसनलिका टुट जाती है। ५.फसल अच्छी लेने के लिए बाहर से ज्यादा खाद डालना पड़ता है। ६.गर्मी मे दरार पड़ने से अधिक गहराई तक हानिकारक जीवाणु नष्ट होते है किंतु जुताई कर देने से सुर्य की प्रकास अंदर नही जा पाती। ७. जुताई करने से खरपतवार के बीज कई चक्रो मे उगते है इसलिए बार - बार निंदाई करनी पड़ती है। ८.बार - बार जुताई करने से डिजल खपत बढ़ती है, ट्रैक्टर का दुरुपयोग होता है, लागत बढ़ती जाती है। ९.ज्यादा जुताई करने से ज्यादा उत्पादन नही होता, जबकि कम जुताई करने से ज्यादा उत्पादन होता है। १०.प्लाऊ से गहरी जुताई करते है, तो उस वर्ष फसल कुछ कमजोर होता है। जमीन की ज्यादा जुताई (Over Tillage) करने के नुकसान बहुत गंभीर होते हैं, खासकर लंबे समय में। हालाँक...

कुछ क्रषि माप प्रणालियां | Agriculture measurement units - Blog 16

कुछ क्रषि माप प्रणालियां - ● 1 आरे = 4 डिसमिल ● 1 एकड़ = 0.405 आरे ● 1 एकड़ = 43560 वर्गफुट ● 1 हेक्टेयर = 2.5 एकड़ ● 1.5 कड़ी का =1 फुट ● 10 जरीब = 660 फुट ● 20 मीटर की एक जरीफ़ होती हे ● सवा जरीफ़ का 1 खंड कधी मे होता हे □ नई प्राडाली के अनुसार ● 66 फुट की जरीफ़ 1 जरीफ़ होती हे ● 1 डिसमिल = 435.5 वर्ग मीटर ● 1 फुट = 1.5 कड़ी ● 1000 वर्ग मीटर = 10 आरे ● कघी 30 जरीफ़ की होती हे , ● स्केल 30 का होता हे ● गुनिया 10 जरीफ़ का होता हे ● 1 हेक्टयेर =100 आरे ● 1 आरे = 100 वर्ग मीटर ● 44 हाथ की एक जरीफ़ होती हे ● गुनिया मे 20 कड़ी 4 मीटर की , ● 10 कड़ी 2 मीटर की होती हे ● कघी मे 15 सेंटीमीटर होते हे ● कघी का 1 धागा 2 डिसमिल का होता हे ● 1 लाख वर्ग कड़ी = 1 एकड़ होता हे ● 108-109 वर्ग फुट = 1 आरे ● कघी 1.5 हेक्टयर की होती हे , ● 1 आरे मे 2500 वर्ग कड़ी होती हे , ● कघी 30 जरीफ़ लम्बी ओर 25 मीटर चोड़ी होती हे ● 1000 वर्ग कड़ी का 1 डिसमिल होता हे, ● 7.92 इंच या 23/25 इंच की 1 कड़ी होती हे ● 100 कड़ी 22 गज या 66 फुट की 1 जरीफ़ होती हे , ● 80 गंतर जरीफ़ का 1 मील होता हे ● 18 इंच का एक हाथ...

नर्मदाष्टकम् स्त्रोत - Blog 15

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|| नर्मदाष्टकम् स्त्रोत || सबिन्दुसिन्धुसुस्खलत्तरङ्गभङ्गरञ्जितं द्विषत्सु पापजातजातकारिवारिसंयुतम् । कृतान्तदूतकालभूतभीतिहारिवर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥१॥ त्वदम्बुलीनदीनमीनदिव्यसम्प्रदायकं कलौ मलौघभारहारि सर्वतीर्थनायकम् । सुमच्छकच्छनक्रचक्रचक्रवाकशर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥२॥ महागभीरनीरपूरपापधूतभूतलं ध्वनत्समस्तपातकारिदारितापदाचलम् । जगल्लये महाभये मृकण्डसूनुहर्म्यदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥३॥ गतं तदैव मे भवं त्वदम्बुवीक्षितं यदा मृकण्डसूनुशौनकासुरारिसेवि सर्वदा । पुनर्भवाब्धिजन्मजं भवाब्धिदुःखवर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥४॥ अलक्षलक्षकिन्नरामरासुरादिपूजितं सुलक्षनीरतीरधीरपक्षिलक्षकूजितम् । वसिष्ठसिष्टपिप्पलादिकर्दमादिशर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥५॥ सनत्कुमारनाचिकेतकश्यपादिषट्पदैः_ धृतं स्वकीयमानसेषु नारदादिषट्पदैः । रवीन्दुरन्तिदेवदेवराजकर्मशर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥६॥ अलक्षलक्षलक्षपापलक्षसारसायुधं ततस्तु जीवजन्तुतन्तुभुक्तिमुक्तिदायकम् । विरञ्चिविष्णुशङ्करस्वकीयधामवर्मदे त्व...

किसान का हित हम सभी का हित - Blog 14

किसान का हित हम सभी का हित :--       हम लोग अपने बच्चों को डेढ़ लाख की मोटर साइकल, लाख का मोबाइल लेकर देने में एक बार भी नहीं कहते कि महँगा है, और किसानों की माँग पर बहस करते है कि दूध और गेहूँ महँगा हो जाएगा। माॅल्स में जाकर अंधाधुंध पैसा उजाड़ने वाले हम सभी गेंहूँ की कीमत बढ़ जाने से डर रहे हैं।        तीन सौ रुपये किलो के भाव से मल्टीप्लैक्स के इंटरवल में पॉपकॉर्न खरीदने वाले मक्का के भाव किसान को तीन रुपये किलो से अधिक न मिलें इस पर बहस कर रहे है। एक बार भी कोई नहीं कह रहा कि मैगी, पास्ता, कॉर्नफ़्लैक्स के दाम बहुत हैं। सबको किसान का क़र्ज़ दिख रहा है और यह कि उस क़र्ज़ की माफी की माँग करके किसान बहुत नाजायज़ माँग कर रहा है।        यह जान लीजिए कि किसान क़र्ज़ में आप और हमारे कारण डूबा है। उसकी फसल का उसको वाजिब दाम इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि उससे खाद्यान्न महँगे हो जाएँगे। 1975 में सोने का दाम 500 रुपये प्रति दस ग्राम था और गेंहू का समर्थन मूल्य किसान को मिलता था 100 रुपये। आज चालीस साल बाद...

वेस्टडीकम्पोजर के उपयोग or use of waste decomposer - Blog 13

वेस्टडीकम्पोजर के उपयोग 1 वेस्टडीकम्पोजर से गोबर खाद को सड़ा गला कर खाद में बदलना 2 भूमि में पूर्व फसलो के अवशेषों को गलाना और खाद में परिवर्तन करना 3 किचन के कचरे से खाद बनाना 4 हानिकारक फंगस से बचाव 5 स्प्रे के रूप में किसी भी फसल की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना 6 फसल को फंगस से सुरक्षा दिलाना 7 फसल के विकास में सहायक परस्थितियों  का निर्माण करना 8 फसल को सुरक्षा प्रदान करना 9 बीजोपचार भी होता है ! "वेस्ट डी-कम्पोजर" (Waste Decomposer) एक जैविक उत्पाद है जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत नेशनल सेंटर फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग (NCOF) द्वारा विकसित किया गया है। इसका मुख्य उपयोग कृषि में जैविक खाद, पौधों की सुरक्षा और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया जाता है। 📌 वेस्ट डी-कम्पोजर के मुख्य उपयोग: 1. जैविक खाद तैयार करने के लिए (Compost Making): वेस्ट डी-कम्पोजर का घोल खेत के जैविक कचरे (जैसे – पत्तियाँ, डंठल, सब्ज़ियों के अवशेष) पर छिड़का जाता है। इससे कचरे का सड़न तेजी से होता है और यह 30-40 दिनों में उत्तम जैविक खाद में बदल जाता है। 2. मिट्टी की गुण...

कम्पोस्ट बनाने का एक नया तरीका नाडेप विधि - Blog 12

कम्पोस्ट बनाने का एक  नया  विकसित तरीका नाडेप विधि है जिसे महारास्ट्र के कृषक नारायण देव राव पांडरी पाण्डेय (नाडेप काका ) ने विकसित किया है | नाडेप विधि में कम्पोस्ट खाद जमीन की सतह का टांका बनाकर उसमें प्रक्षेत्र अवशेष तथा बराबर मात्रा में खेती की मिट्टी तथा गोबर को मिलाकर बनाया जाता है | इस विधि से 1 किलो गोबर से 30 किलो खाद चार माह में बनकर तैयार हो जाती है नाडेप कम्पोस्ट का टांका उस स्थान पर बनाया जाये जहाँ भूमि समतल हो तथा जल भराव की समस्या न हो | टांका के निर्माण हेतु आन्तरिक माप 10 फीट लम्बी, 6 फीट चौड़ी और 3 फीट गहरी रखनी चाहिए | इस प्रकार टांका का आयतन 180 घन फीट हो जाता है | टांका की दीवार 9 इंच चौड़ी रखनी चाहिए | दीवार को बनाने में विशेष बात यह है की बीच बीच में यथा स्थान छेद छोड़ें जाएँ जिससे की टांका में वायु का आवागमन बना रहे और खाद सामग्री आसानी से पक सकें | प्रत्येक दो इंटों के बाद तीसरी ईंट की जुड़ाई करते समय 7 इंच के छेद छोड़ देना चाहिए | 3 फीट ऊँची दीवार में पहले, तीसरे, छठे और नवें रददे में छेद बनाने चाहिए | दीवार के भीतरी व् बाहरी हिस्से को गाय या भैंस...

डीकम्पोज़र किसान के लिए संजीवनी बूटी || West Decomposer - Blog 11

यदि आप किसान हे और इसके बारे मे नहीँ जानते तो आज ही youtube पर west decamposer सर्च करे इसे केवल 1बार ही किसान को खरीदना हेऔर बार बार घर पर ही जामन की तरह प्रयोग करना हे इसी से खाद,कीटनाशक,fungisideसब बनेगा वौ भी घर पर केवल गुड़ का खर्च आएगा | ना कोई खाद , ना पेस्टिसाइड , ना फफूंदनाशी सिर्फ वेस्ट decamposer इसके प्रयोग से बजार से कोई भी खाद,कीटनाशक,fungiside(urea,dap,mop,मल्टीप्लेयर,psb,razobium,कौराजन,trizo,मँकोजेबआदी की किसी की ज़रूरत नहीँ) सिर्फ  डीकम्पोज़र ही काफी हे | डिकम्पोज़र  राष्टीय खेती केंद्र गाजियाबाद द्वारा बनाया गया अपशिष्ट विघटनकारी है| इसमे देसी गाय के 4-5तरह के bactiria हे जौ अलग अलग काम करते हे | इसके साथ साथ यह कृषि की एक नई विधि भी है जो पुर्ण रूप से जैविक (natural)है किसानों की लागत को आधा से भी कम कर देता  है , पेस्टिसाइड पर होने वाले खर्च को बहुत कम कर देती है |और उपज मे बढ़वार होती हे | एक गाँव के किसानों के लिये  1-2डिब्बी काफी हे 1ड्रम बना लेना  wdc का फ़िर इसी ड्रम से  5-10लीटर दवाई बाट लेना सभी को डिब्बी खरीदने की ज़रूर...

एलोविरा बिजनस का कम्पलीट सुझाव - Blog 10

गवार पाठा (ऐलोविरा) कि खेती का 1 acre ( एकड़) का हिसाब 1 एकड़ मे 2×2फिट 10500 पौधे लगाते है जिसकी लागत 4 रूपये पर पौधा (पौधा + गाडी भाडा ) है इस प्रकार 10500×4= 42000किसान का खर्च होगागवार पाठा को 25 दिन मे 1 बार पानी लागाया जाता है यह किसी भी समय लगाया जा सकता हे लगाने के 11'से 12 महिने बाद पौधा तैयार हो जाता है उसके बाद पत्तीयों कि कटाई होगी। गीली पत्तियों को हमआपके खेत से हम 3 रुपये किलो से खरीदेगे ऐक पौधे के पतियों का वजन 4 से 7 किलो हो जाता हैउस प्रकार 1 एकड़ मे 10500 पौधे (10500×4kg= 42000 kg) हो जाता है 42000×3= 1,26,000 रुपये कि कमाई होगी इसमे वर्षा ऋतु मै और वसन्त ऋतु मै बहुत सारे पौधेभी निकलते है । उसके बाद 6 महिने मे कटाई होती रहेगी यह क्रम 5 - 6 साल तक चलता रहेगा Note :- 1.ये पोधे 2 *2 फीट की दूरी पर लगते हैं । आप अपने लोकल खेती का माप भीगा ( भीगा ) से भी calculte कर सकते हैं। 2.ये उपज हमारे पिछले अनुभवों और कई किसानों से आंकड़े प्राप्त करने के बाद का है । 3.कुछ आंशिक परिवर्तन उपज और कमाई हो सकता है। आप 1 एकड़ से कमाई 2 से 3 लाख तक मानसकते है। 4.Payment के ...