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जैविक खाद के लाभ | Benefits of organic farming - Blog 37

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जैविक खाद के लाभ जैविक खादों के प्रयोग से मृदा का जैविक स्तर बढ़ता है, जिससे लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है और मृदा काफी उपजाऊ बनी रहती है। ● जैविक खाद पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ प्रदान कराते हैं, जो मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीवों के द्वारा पौधों को मिलते हैं जिससे पौधों स्वस्थ बनते हैं और उत्पादन बढ़ता है। ● रासायनिक खादों के मुकाबले जैविक खाद सस्ते, टिकाऊ तथा बनाने में आसान होते हैं। इनके प्रयोग से मृदा में ह्यूमस की बढ़ोतरी होती है व मृदा की भौतिक दशा में सुधार होता है। ● पौध वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तथा काफी मात्रा में गौण पोषक तत्वों की पूर्ति जैविक खादों के प्रयोग से ही हो जाती है। ● कीटों, बीमारियों तथा खरपतवारों का नियंत्रण काफी हद तक फसल चक्र, कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं, प्रतिरोध किस्मों और जैव उत्पादों द्वारा ही कर लिया जाता है। ● जैविक खादें सड़ने पर कार्बनिक अम्ल देती हैं जो भूमि के अघुलनशील तत्वों को घुलनशील अवस्था में परिवर्तित कर देती हैं, जिससे मृदा का पी-एच मान 7 से कम हो जाता है। अतः इससे सू...

Moringa drumstick cultivation | मोरिनगा सहजन की खेती - Blog 36

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Moringa drumstick cultivation (मोरिनगा सहजन की खेती) AR 32 Exeter quality seeds ( MORINGA) ➡️ सहजनमुनगा मोरिनगा सहरजना के नाम से जाना जाता है ! हर घर सहजन पेड लगाएं स्वस्थ निरोगी काया पाए ।  ・सहजन की खेती करे कमाए प्रति एकड जमीन से 2 लाख से 2.5 लाख तक की अछि कमाई कर सकते हैं । ・Moringa AR 32 एक धूप ओर गर्मी सहन करने वाला पौधा है। कम रख -रखाव के साथ अच्छा परिणाम देता है ・AR 32 की पहली फसल है जो 6-7 महीने में ली जाती है । पहले वर्ष में 20 से 25 किलो तक पैदावार देता है दूसरे वर्ष में 35 से 40 किलो तक पैदावार देता रहेगा और 7 से 8 साल तक मोटी कमाई कर सकते हैं । ・प्रति एकड जमीन में 1200 पौधे रोपे जाते हैं । पौधे से पौधे की दूरी 5 × 8  फिट पर लगा सकते हैं । ・पौध रोपण करने के 3 माह में फुल (flooring start ) और 6 से 7 माह में फली उतारना शुरू हो  जाती है ओर लगातार 6 माह तक लगातार फली उतरती है ओर 6 माह पौधे को रेस्ट देना पडता है ताकि आने वाले वर्ष मे फसल मे बढोतरी मिले ओर पौधे आयु ओर फसल की गुणवत्ता बढती है । ・सहजन की खेती से अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं ...

केचुओं के जीवनचक्र से संबंधित जानकारियाँ | Life cycle of Earthvarn - Blog 35

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||केचुओं के जीवनचक्र से संबंधित जानकारियाँ || 1. केंचुए द्विलिंगी (Bi-sexual or hermaphodite ) होते हैं अर्थात एक ही शरीर में नर (Male) तथा मादा (Female) जननांग (Reproductive Organs) पाये जाते हैं। 2. द्विलिंगी होने के बावजूद केंचुओं में निषेचन (Fertilization) दो केंचुओं के मिलन से ही सम्भव हो पाता है क्योंकि इनके शरीर में नर तथा मादा जननांग दूर-दूर स्थित होते हैं और नर शुक्राणु (Sperms) व मादा शुक्राणुओं (Ovums) के परिपक्व होने का समय भी अलग-अलग होता है। सम्भोग प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद केंचुए कोकून बनाते हैं। कोकून का निर्माण लगभग 6 घण्टों में पूर्ण हो जाता है। 3. केंचुए लगभग 30 से 45 दिन में वयस्क (Adult) हो जाते हैं और प्रजनन करने लगते हैं। 4. एक केंचुआ 17 से 25 कोकून बनाता है और एक कोकून से औसतन 3 केंचुओं का जन्म होता है। 5. केंचुओं में कोकून बनाने की क्षमता अधिकांशतः 6 माह तक ही होती है। इसके बाद इनमें कोकून बनाने की क्षमता घट जाती है। 6. केंचुओं में देखने तथा सुनने के लिए कोई भी अंग नहीं होते किन्तु ये ध्वनि एवं प्रकाश के प्रति संवेदनशील होते हैं औ...

आम के रोग और बचाव | Mango Disease and Treatment - Blog 34

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आम पर लगने वाले रोग व उनसे बचाव के उपाय:- १. सफेद चूर्णी रोग (पाउडरी मिल्ड्यू)-   बौर आने की अवस्था में यदि मौसम बदलने वाला हो या बरसात हो रही हो तो यह बीमारी प्रायः लग जाती है। इस बीमारी के प्रभाव से रोगग्रस्त भाग सफेद दिखाई पड़ने लगता है। अंततः मंजरियां और फूल सूखकर गिर जाते हैं। इस रोग के लक्षण दिखाई देते ही आम के पेड़ों पर ५ प्रतिशत वाले गंधक के घोल का छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त ५०० लिटर पानी में २५० ग्राम कैराथेन घोलकर छिड़काव करने से भी बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में बौर आने के समय मौसम असामान्य रहा हो वहां हर हालत में सुरक्षात्मक उपाय के आधार पर ०.२ प्रतिशत वाले गंधक के घोल का छिड़काव करें एवं आवश्यकतानुसार दोहराएं। २. कालवूणा (एन्थ्रेक्नोस)-   यह बीमारी अधिक नमी वाले क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है। इसका आक्रमण पौधों के पत्तों, शाखाओं और फूलों जैसे मुलायम भागों पर अधिक होता है। प्रभावित हिस्सों में गहरे भूरे रंग के धब्बे आ जाते हैं। प्रतिशत ०.२ जिनकैब का छिड़काव करें। जिन क्षेत्रों में इस रोग की सम्भावना अधिक हो वहां सुरक्षा के तौर पर पहले ही घ...

Reality of April fool | अप्रैल फूल किसी को कहने से पहले इसकी वास्तविक सत्यता जरुर जान ले - Blog 33

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"अप्रैल फूल" किसी को कहने से पहले इसकी वास्तविक सत्यता जरुर जान ले.!! पावन महीने की शुरुआत को मूर्खता दिवस कह रहे हो !! पता भी है क्यों कहते है अप्रैल फूल (अप्रैल फुल का अर्थ है - हिन्दुओ का मूर्खता दिवस). ?? ये नाम अंग्रेज ईसाईयों की देन है… मुर्ख हिन्दू कैसे समझें "अप्रैल फूल" का मतलब बड़े दिनों से बिना सोचे समझे चल रहा है अप्रैल फूल, अप्रैल फूल ??? इसका मतलब क्या है.?? दरअसल जब ईसाइयत अंग्रेजो द्वारा हमे 1 जनवरी का नववर्ष थोपा गया तो उस समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार 1 अप्रैल से अपना नया साल बनाते थे, जो आज भी सच्चे हिन्दुओ द्वारा मनाया जाता है, आज भी हमारे बही खाते और बैंक 31 मार्च को बंद होते है और 1 अप्रैल से शुरू होते है, पर उस समय जब भारत गुलाम था तो ईसाइयत ने विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते हुए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस "अप्रैल फूल" का नाम दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे अब आप ही सोचो अप्रैल फूल कहने वाले कितने सही हो आप ? याद रखो अप्रैल माह से जुड़े हुए इतिहासिक दिन और त्यौहार 1. हिन्दुओं का पावन महिना इस दिन से...

हनुमान जयंती | Hanuman Jayanti - Blog 32

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हनुमान जयंती धर्म ग्रंथों में हनुमानजी के 12 नाम बताए गए हैं, जिनके द्वारा उनकी स्तुति की जाती है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीहनुमान अंक के अनुसार हनुमानजी के इन 12 नामों का जो रात में सोने से पहले व सुबह उठने पर अथवा यात्रा प्रारंभ करने से पहले पाठ करता है, उसके सभी भय दूर हो जाते हैं और उसे अपने जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं। वह अपने जीवन में अनेक उपलब्धियां प्राप्त करता है। हनुमानजी की 12 नामों वाली स्तुति इस प्रकार है-  स्तुति हनुमानअंजनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबल:। रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोअमितविक्रम:।। उदधिक्रमणश्चेव सीताशोकविनाशन:। लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।। एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:। स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।। तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्। राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन।। इन 12 नामो से होती है हनुमानजी की स्तुति, जानिए इनकी महिमा 1. हनुमान   हनुमानजी का यह नाम इसलिए पड़ा क्योकी एक बार कोधित होकर देवराज इंद्र ने इनके ऊपर अपने वज्र प्रहार किया था यह वज्र सीधे इनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा। हनु...

जैविक सूक्ष्म तत्व (Micronutrients) बनाने की सामग्री और विधि - Blog 31

नया फॉर्मूला जैविक सूक्ष्म तत्व बनाने का सामग्री :: 1. 2किलो मक्का 2. 2 किलो सरसो 3. 2 किलो तिल 4. 2 किलो सूरजमुखी 5. 2 किलो मूंग 6. 2 किलो अरहर 7. 11 लोहे(iron) की मीडियम साइज की किले 8. तांबे के कोई पात्र या तार 9. 100 लीटर वेस्टडीकम्पोजर विधि :: मक्का,सरसो,तिल, सूरजमुखी,मूंग व अरहर को पीस कर बारीक आटा बना ले ।अब इन सब को 100 लीटर वेस्ट डीकम्पोजर में डाले और अच्छी तरह मिक्स कर दे । अब इसमें 11 किले लोहा को तांबे के पात्र मे डाले ।रोज इसको चलाते रहे ।7 से 10 दिन में आपका सॉल्यूशन तैयार है । जिसमे सभी सूक्ष्म तत्व जैसे आयरन , केल्शियम, मैग्नेशियम, प्रोटीन , विटामिन, पोटेशियम आदि सभी की मात्रा मिलेगी । यह पोस्ट सिर्फ आपकी जानकारी के लिए है इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ से जरूर सलाह दें| नया फॉर्मूला: जैविक सूक्ष्म तत्व (Micronutrients) बनाने की सामग्री और विधि (घरेलू जैविक खेती के लिए उपयोगी मिश्रण) यह जैविक सूक्ष्म तत्व मिश्रण मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारने और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी को पूरा करने के लिए उपयोगी है। 🌱 सामग्री (...

उर्वरको से जुडे कुछ सवाल जवाब | Fertilizers Related Questions - Blog 30

1. प्रश्न- जैव उर्वरक क्या है ? उत्तर- कल्चर ही जैव उर्वरक है। यह जीवित सूक्ष्म जीवाणुओं से बना हुआ एक प्रकार का टीका है जैसे राइजोबियम, पी0एस0बी0 तथा एजैटोबैक्टर। 2. प्रश्न- पोटाश की खाद (म्यूरेट आफ पोटाश) का प्रयोग कब और कैसे करें ? उत्तर- हल्की मृदा में (बलुअर, बलुअर दोमट) में पोटाश का प्रयोग दो या तीन बार में लाभदायी होता है, क्योंकि हल्की मृदा में पोटाश पानी में घुलकर जड़ों के काफी नीचे चला जाता है। 3. प्रश्न- विभिन्न प्रकार की खाद एवं उर्वरक मौजूद है इन सबके प्रयोग का समय बतायें ? उत्तर- हरी खाद बुवाई से डेढ़ माह पूर्व, कम्पोस्ट/वर्मी बुवाई से एक माह पहले खेत में भली भॉंति मिला देना चाहिए। उर्वरकों (नत्रजनधारी, फास्फेटिक एवं पोटाश) का प्रयोग बुवाई के समय इस प्रकार करना चाहिए कि नत्रजनधारी की आधी मात्रा फास्फेट एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय खेत में डाले तथा नत्रजन की शेष आधी मात्रा टाप ड्रेसिंग के रूप में खड़ी फसल में डाले। सूक्ष्म पोषक तत्वों वाली उर्वरक का प्रयोग मिट्टी जॉंच के आधार पर बुवाई के समय खेत में डालना चाहिए। 4. प्रश्न- धान के खेतों में नील हरित...

मिट्टी परीक्षण क्या है | What is Soil Testing - Blog 29

मिट्टी परीक्षण क्या है- खेत की मिट्टी में पौधो की समुचित वृध्दि एवं विकास हेतु आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्राओं का रासायनिक परीक्षणों द्वारा आंकलन करना साथ ही विभिन्न मृदा विकास जैसे मृदा- लवणीयता, क्षारीयता एवं अम्लीयता की जांच करना मिट्टी परीक्षण कहलाता है| मिट्टी परीक्षण की आवश्यकता- पौधो की समुचित वृध्दि एवं विकास के लिये सर्वमान्य रूप से सोलह पोषक तत्व आवश्यक पाये गये है । यह अनिवार्य पोषक तत्व है। कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन, नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्निशियम एवं सल्फर ( मुख्य या अधिक मात्रा मे लगने वाले आवश्यक पोषक तत्व ) इन पोषक तत्वों मे से प्रथम तीन तत्वों को पौधे प्राय: वायु व पानी से प्राप्त करते है तथा शेष 13 पोषक तत्वों के लिये ये भूमि पर निर्भर होते है । सामान्यत: ये सभी पोषक तत्व भूमि में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रहते है । परन्तु खेत में लगातार फसल लेते रहने के कारण मिट्टी से इन सभी आवश्यक तत्वों का ह्ास निरन्तर हो रहा है । असन्तुलित पौध पोषण की दशा में फसलो की वृध्दि समुचित नहीं हो पाती तथा पौधो के कमजोर होने एवं रोग व्याधि, कीट आदि से ग्रसित...

PESTOZ मोबाइल ऐप: आपके स्मार्टफोन में 24x7 फसल डॉक्टर - Blog 28

PESTOZ Mobile App. भारत का पहला मोबाइल ऐप्स जो मात्र 10 सेकंड में खेत में लगी बीमारी ऒर उसका सॉल्यूशन बता देता है एक बार उपयोग करके जरूर देखें https://youtu.be/xGzEB5yaeW4 इस्तेमाल करने का तरीका इस वीडियो से समझे                 इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा किसान दोस्तो तक शेयर करें खेत में लगी बीमारी जानने के लिए डाउनलोड करो  playstore  bit.ly/pestoz PESTOZ मोबाइल ऐप: आपके स्मार्टफोन में 24x7 फसल डॉक्टर PESTOZ एक अत्याधुनिक मोबाइल एप्लिकेशन है जो किसानों को उनकी फसलों में होने वाले रोगों की पहचान करने में मदद करता है। यह ऐप विशेष रूप से भारत के किसानों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे वे केवल अपने स्मार्टफोन के कैमरे का उपयोग करके फसल रोगों की पहचान कर सकते हैं। 🌿 PESTOZ ऐप की प्रमुख विशेषताएं: तेज़ और सरल प्रक्रिया : रोगग्रस्त पौधे या फसल का चयन करें। प्रभावित हिस्से की तस्वीर खींचें और ऐप में अपलोड करें। कुछ ही सेकंड में, ऐप रोग का विवरण और समाधान प्रदान करता है। समर्थित फसलें : टमाटर, फूलगोभी, पत्ता गोभी, ...

सिर्फ 800 रुपये में ऐसे त्यार करें जैविक खाद की फैक्टरी - Blog 26

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सिर्फ 800 रुपये में ऐसे त्यार करें जैविक खाद की फैक्टरी चार साल पहले, तमिलनाडु के इरोड जिले के गोबिचेत्तिपालयम स्थित मृदा कृषि विज्ञान केंद्र से मिली थोड़ी सी कागजी मदद से किसान जी. आर. सक्थिवेल के ऐसे ही एक प्रयास को भारत की किसान बिरादरी ने सराहा। सक्थिवेल ने गोबर से तरल खाद बनाने में सफलता पाई जिसका फसलों की पैदावार बढ़ाने में सफल इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने एक कंटेनर या डिब्बा खाद फैक्ट्री का विचार दिया। जिसमे न तो कोई सीमेंट का ढांचा खड़ा करना था, ना ही मजदूरी का खर्च था और ना ही कोई निर्माण का खर्च शामिल था। उन्होंने जिस सामान का इस्तेमाल किया वो एक प्लास्टिक का ड्राम (पीपा) था।इस पूरी व्यवस्था पर महज 800 से 1000 रुपये तक का ही खर्च बैठता है। ड्राम या पीपा व्यवस्था के दो फायदे हैं। पहला और सबसे स्पष्ट फायदा यह है कि यह आसानी से वहन करने योग्य है। दूसरा और समान रुप से अहम बात ये है कि इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है। सीमेंट के अचल ढांचे से अलग, पीपे या ड्राम को किसान की जरूरत के हिसाब से खेत में कहीं भी रखा जा सकता है। इसका रख-रखाव भी बेहद आसान है और इसकी सफाई में भी ज्य...