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कीटनाशक के उपयोग के समय क्‍या करें, क्‍या न करें । Pesticides Procuration - Blog 53

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  1. कीटनाश के उपयोग के समय क्‍या करें, क्‍या न करें । कीटनाशक और जैव कीटनाशक सिर्फ पंजीकृत कीटनाशक डीलर से ही खरीदें जिसके पास वैध लाइसेंस हो। एक विशिष्‍ट क्षेत्र में एक बार के छिड़काव के लिए जितनी आवश्‍यकता हो, उतना ही कीटनाशक खरीदें। कीटनाशकों के कंटेनर या पैकेट पर मान्‍यता प्राप्‍त लेबल देखें। लेबल पर बैच संख्‍या, पंजीकरण संख्‍या, मैन्‍युफैक्‍चर और एक्‍सपाइरी तिथि देखें। कंटेनर में अच्‍छी तरह से पैक किए हुए कीटनाशक ही खरीदें। फुटपाथ के डीलरों या ऐसे डीलर जिनके पास लाइसेंस नहीं हो, उनसे कीटनाशक न खरीदें। एक साथ अधिक मात्रा में कीटनाशक न खरीदें। कंटेनर पर पंजीकृत लेबल न होने पर कीटनाशक न खरीदें। कभी भी कीटनाशक की एक्‍सपाइरी तिथि खत्‍म होने के बाद उसे न खरीदें। कीटनाशकों के ऐसे कंटेनर जो लीक कर रहे हों या खुले हों या फिर जिन पर सील न हो, उन्‍हें न खरीदें। कीटनाशकों का संग्रहण घर से दूर करना चाहिए। कीटनाशकों को उन्‍हीं के कंटेनर में रहने दें। कीटनाशकों/खरपतवारनाशक को अलग-अलग संग्रहित किया जाना चाहिए। जिस क्षेत्र में कीटनाशकों को संग्रहित किया गया ह...

Micro Irrigation | सूक्ष्म सिंचाई | Drip irrigation | टपका सिंचाई | Sprinkler Irrigation | बौछार सिंचाई - Blog 52

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Micro Irrigation (सूक्ष्म सिंचाई) 1. Drip irrigation (टपका सिंचाई) 2. Sprinkler Irrigation (बौछार सिंचाई) Facts Irrigation : वर्तमान में पृथ्वी पर 140 करोड़ घन मीटर जल है जिसका 97 प्रतिशत भाग खारा जल है जो समुद्रों में स्थित है। मनुष्यों के हिस्से में कुल 136 हजार घन मीटर जल ही बचता है। संपूर्ण विश्व में जल की खपत प्रत्येक 20 वर्ष में दुगुनी हो जाती है जबकि धरती पर उपलब्ध जल की मात्रा सीमित है। टपक सिंचाई क्या है? टपक सिंचाई  सिंचाई की वह विधि है जिसमें जल को मंद गति से बूँद-बूँद के रूप में फसलों के जड़ क्षेत्र में एक छोटी व्यास की प्लास्टिक पाइप से प्रदान किया जाता है।  इस सिंचाई विधि का आविष्कार सर्वप्रथम इसराइल में हुआ था जिसका प्रयोग आज दुनिया के अनेक देशों में हो रहा है।  इस विधि में जल का उपयोग अल्पव्ययी तरीके से होता है जिससे सतह वाष्पन एवं भूमि रिसाव से जल की हानि कम से कम होती है। टपक सिंचाई के लाभ : 1. टपक सिंचाई में जल उपयोग दक्षता 95% तक होती है जबकि पारम्परिक सिंचाई प्रणाली में जल उपयोग दक्षता लगभग 50 % तक ही होती है।  2. ...

सुक्ष्म सिंचाई क्या है ? | What is Micro Irrigation - Blog 51

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सुक्ष्म सिंचाई क्या है ?  सुक्ष्म सिंचाई का विकास  भारत में सुक्ष्म सिंचाई  सुक्ष्म सिंचाई की प्रणाली   सिचाई के उद्देश  सुक्ष्म सिंचाई के हनिया  निष्कर्ष 1. सुक्ष्म सिंचाई क्या है ? सूक्ष्म सिंचाई सिंचाई की एक वैज्ञानिक एवं उन्नत सिंचाई प्रणाली है, जिसमें बहुत ही कम पानी का उपयोग करके अधिक से अधिक फसल उत्पादन कर सकते हैं ।  सुक्ष्म सिंचाई विधि मुख्य रुप से कुछ क्षेत्रों के लिए उपयोगी है। जहां पर पानी की कमी है। जिससे 70 - 80 % पानी की बचत होती हैं। 2. सुक्ष्म सिंचाई का विकास : 1860 - सबसे पहले जर्मनी में कुछ कार्य किये गये। 1913 - अमेरिका के कालोरेड़ो में श्री हॉउस द्वारा एक अध्ययन किया गया।  1920 - जर्मनी में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली जब छिद्र वैल पाइप से ड्रिप सिंचाई आंरभ की गई।  1940 - सिम्बा ब्लास नामक एक इजरायली इंजीनियर ने यह देखा कि नल के निकट जो वृक्ष था वह नया वृक्षों की तुलना में अधिक विकसित तथा। कारण अधिक विकसित वृक्ष को नल से रिसता हुआ  1960 - के बाद उत्तरोतर वृद्धि हुई। अमेरिका, आस्ट्रलिया, इजरा...

सोयाबीन फसल के महत्वपूर्ण कीट एवं उनका प्रबंधन | Soybean Stem Borer - Blog 50

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|| सोयाबीन फसल के महत्वपूर्ण कीट एवं उनका प्रबंधन || तना मक्खी :- पहचान चिन्ह:- 1. वयस्क मक्खी छोटे आकार 2 मि.मी. की चमकदार काले रंग की होती है यह जून से अप्रैल माह में सक्रिय रहती है। 2. इसके पैर श्रृंगिकाए तथा पंखों की शिरायें हल्के भूरे रंग की होती है। 3. ग्रसित तनों को चीरने पर तना खोखला दिखाई देता है, मध्य भाग गहरा लाल या भूरे रंग का हो जाता है। 4. इसकी इल्ली जिसे मेगट कहते हैं, हल्के सफेद रंग की बेलनाकार होती है जिसकी लंबाई 2 मी.मी.होती है। 5. मेगट का आकार अग्र भाग जिसमें मुखांग होते हैं, नुकीला तथा पश्चात भाग गोल तथ चपटा होता है 6. शंखी तने के अंदर ही बनती है जिसका रंग भूरा तथा लंबाई 2-3 मी.मी. होती है। क्षति लक्षण:- 1. इस कीट की इल्ली अवस्था ही हानिकारक होती है। 2. नव विकसित मेगट पत्तियों के डठंलों से तने के अंदर घुसती है और टेढी, मेढ़ी बनाती है। 3. ग्रसित पौधों में प्रारंभ में पत्तियों की ऊपरी सतह भाग सूख जाता है। 4. इसकी शंखी भी तने के अंदर ही बनती है अत: छिद्र का उपयोग मक्खी पौधे के बाहर निकलने में करती है। 5. यह कीट सोयाबीन की संपूर्ण अवधि तक सक्रिय...

जैव रसायन का कृषि में उपयोग | use of Bio Chemical in agriculture - Blog 49

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🌿 जैव रसायन (Biochemistry) का कृषि में उपयोग जैव रसायन (Biochemistry) वह विज्ञान है जो पौधों और जीवों में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है। कृषि में जैव रसायन का उपयोग उत्पादन बढ़ाने, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, और पौधों की सेहत बनाए रखने के लिए किया जाता है। 🔬 कृषि में जैव रसायन के मुख्य उपयोग क्षेत्र उपयोग 1. पौधों की वृद्धि हार्मोन (जैसे ऑक्सिन, साइटोकाइनिन, जिबरेलिन) का अध्ययन कर फसल की बढ़वार को नियंत्रित करना। 2. पोषक तत्वों की पहचान पौधों में पोषण की कमी (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) को पहचानना और सही उर्वरकों का चयन करना। 3. जैव उर्वरक (Biofertilizers) नाइट्रोजन फिक्सिंग जीवाणु (Rhizobium, Azotobacter) का उपयोग फसल उत्पादन बढ़ाने में। 4. कीट और रोग नियंत्रण पौधों में रसायनिक बदलाव देखकर बीमारी या कीट का पता लगाना और समय पर जैविक/रासायनिक उपाय अपनाना। 5. बीज विज्ञान बीज अंकुरण, बीज उपचार और बीज की गुणवत्ता परीक्षण में जैव रासायनिक परीक्षणों का उपयोग। 6. मिट्टी की उर्वरता मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्मजीवों और एंजाइमों के ...

वर्मीकम्पोस्ट बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें - Blog 48

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वर्मीकम्पोस्ट बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें :  कमसमय में अच्छी गुणवत्ता वाली वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए निम्न बातों पर विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है । 1. वर्मी बेडों में केंचुआ छोड़ने से पूर्व कच्चे माल (गोबर व आवश्यक कचराद्) का आंशिक विच्छेदन ( जिसमें 15 से 20 दिन का समय लगता है ) करना अति आवश्यक है। 2. आंशिक विच्छेदन की पहचान के लिए ढेऱ में गहराई तक हाथ डालने पर गर्मीं महसूस नहीं होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में कचरे की नमीं की अवस्था में पलटाई करने से आंशिक विच्छेदन हो जाता है। 3. वर्मी बेडों में भरे गये कचरे में कम्पोस्ट तैयार होने तक 30 से 40 प्रतिशतनमी बनाये रखें। कचरें में नमीं कम या अधिक होने पर केंचुए ठीक तरह से कार्य नही करतें। 4. वर्मीवेडों में कचरे का तापमान 20 से27 डिग्री सेल्सियस रहना अत्यन्त आवश्यक है। वर्मीबेडों पर तेज धूप न पड़ने दें। तेज धूप पड़ने से कचरे का तापमान अधिक हो जाता है परिणामस्वरूप केंचुए तली में चले जाते हैं अथवा अक्रियाशील रह कर अन्ततः मर जाते हैं। 5. वर्मीबेड में ताजे गोबर का उपयोग कदापि न करें। ताजे गोबर में गर्मी (Heat) अधिक होन...

बथुआ के बारे में कुछ बाते | chenopodium album - Blog 47

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सागो का सरदार है बथुवा सबसे अच्छा आहार है बथुवा बथुवा अंग्रेजी - Lamb's Quarters,  वैज्ञानिक नाम - Chenopodium album. सीजन - खरीब फसल साग और रायता बना कर बथुवा अनादि काल से खाया जाता  रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए प्लस्तर में बथुवा मिलाते थे और हमारी बुढ़ियां , सिर से ढेरे व फांस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए बथुवै के पानी से बाल धोया करती। बथुवा गुणों की खान है और भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं तभी तो मेरा भारत महान है। बथुवै में क्या क्या है?? मतलब कौन कौन से विटामिन और मिनरल्स?? तो सुने, बथुवे में क्या नहीं है??  बथुवा विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और विटामिन C से भरपूर है तथा बथुवे में कैल्शियम,  लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं।  100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर 43  Kcal होती है। ज...

अटल बिहारी वाजपेयी | Atal Bihari Vajpayee - Blog 46

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जन्म - 24 दिसंबर 1924 ग्वालियर, मध्य प्रदेश मृत्यु - 16 अगस्त 2018 (उम्र 93) नई दिल्ली राजनैतिक दल - भारतीय जनता पार्टी  || प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं : || मृत्यु या हत्या अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह) कैदी कविराय की कुण्डलियाँ संसद में तीन दशक अमर आग है कुछ लेख: कुछ भाषण सेक्युलर वाद राजनीति की रपटीली राहें बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि। मेरी इक्यावन कविताएँ || पुरस्कार :|| 1992  :  पद्म विभूषण 1993  : डी लिट ( कानपुर विश्वविद्यालय ) 1994  :  लोकमान्य तिलक  पुरस्कार 1994  : श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार 1994  : भारत रत्न  पंडित गोविंद वल्लभ पंत  पुरस्कार 2015  : डी लिट ( मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय ) 2015  : 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड', ( बांग्लादेश  सरकार द्वारा प्रदत्त) 2015  :  भारतरत्न  से सम्मानित || जीवन के कुछ प्रमुख तथ्य || आजीवन अविवाहित रहे। वे एक ओजस...

डॉ एम एस स्वामीनाथन | हरित क्रांति के जनक | Dr M S Swaminathan - Blog 45

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पूरा नाम - मंकोम्बो सम्बासीवन स्वामीनाथन जन्म - 7 अगस्त, 1925 जन्म भूमि - कुंभकोणम, तमिलनाडु कर्म भूमि - भारत वैज्ञानिक पुरस्कार - उपाधि 'पद्म श्री', 'पद्म भूषण', 'पद्म विभूषण', 'रेमन मैगसेसे पुरस्कार', विश्व खाद्य पुरस्कार आदि। प्रसिद्धि कृषि वैज्ञानिक विशेष योगदान स्वामीनाथन को "भारत में हरित क्रांति के जनक" ( Indian Father of Green Revolution ) माना जाता है।  उनके प्रयत्नों का परिणाम यह है कि भारत की आबादी में प्रतिवर्ष पूरा एक ऑस्ट्रेलिया समा जाने के बाद भी खाद्यान्नों के मामले में वह आत्मनिर्भर बन चुका है। नागरिकता भारतीय संबंधित लेख हरित क्रांति, पंचवर्षीय योजना अन्य जानकारी लंदन की रॉयल सोसायटी सहित विश्व की 14 प्रमुख विज्ञान परिषदों ने एम. एस. स्वामीनाथन को अपना मानद सदस्य चुना है। अनेक विश्वविद्यालयों ने डॉक्टरेट की उपाधियों से उन्हें सम्मानित किया है।  अनुवांशिकी विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय प्रशासक, जो भारत की 'हरित क्रांति' में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका के लिए विख्यात हैं। इन्होंने 1966 में मैक्सिको ...