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ओंकारेश्वर परिक्रमा या मांधाता पर्वत की परिक्रमा | Omkareshwar Parikrama or Parikrama of Mandhata Mountain
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ओंकारेश्वर परिक्रमा या मांधाता पर्वत की परिक्रमा एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक यात्रा मानी जाती है, जो मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित नर्मदा नदी के बीचों-बीच बसे हुए मांधाता द्वीप पर की जाती है। इस द्वीप का आकार स्वयं ॐ (ओं) के आकार जैसा है, जिससे इसे ओंकारेश्वर कहा जाता है।
🔱 1. परिक्रमा का महत्व:
यह परिक्रमा नर्मदा तट पर स्थित है और धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ मानी जाती है।
मान्यता है कि यहां की परिक्रमा करने से पुण्य, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, इस यात्रा का केंद्र है।
मांधाता पर्वत परिक्रमा लगभग 7 से 9 किलोमीटर लंबी होती है।
🛕 2. परिक्रमा मार्ग:
ओंकारेश्वर की परिक्रमा नर्मदा नदी के द्वीप मांधाता पर की जाती है और इसमें कई तीर्थ और धार्मिक स्थल आते हैं:
ओंकारेश्वर मंदिर – यात्रा का प्रारंभ यहीं से होता है।
सिद्धनाथ मंदिर – प्राचीन स्थापत्य कला का उदाहरण।
पंचमुखी गणेश – दुर्लभ पंचमुखी गणपति की मूर्ति।
रिंचूर मठ – श्री आदि शंकराचार्य जी का साधना स्थल।
गौमुख कुंड – नर्मदा का पवित्र जल यहां से निकलता है।
काशी विश्वनाथ मंदिर – काशी के भगवान का रूप।
मांधाता गुफा – राजा मांधाता की तपस्या स्थली।
अहिल्या गुफा – अहिल्या माता की आराधना स्थली।
🚶♂️ 3. परिक्रमा कैसे करें:
परिक्रमा पैदल की जाती है, सामान्यतः 3-4 घंटे लगते हैं।
मार्ग में सीढ़ियाँ, घाट और पहाड़ी रास्ते आते हैं।
भक्तगण नंगे पांव और मौन व्रत में भी परिक्रमा करते हैं।
जल, फल और प्रसाद की सुविधा मार्ग में उपलब्ध रहती है।
🌅 4. यात्रा का उत्तम समय:
शरद पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, श्रावण मास, महाशिवरात्रि, नर्मदा जयंती – इन पर्वों पर विशेष भीड़ रहती है।
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त होता है यात्रा के लिए।
📜 5. धार्मिक मान्यताएं:
मांधाता पर्वत पर राजा मांधाता ने घोर तप किया था और भगवान शिव को प्रसन्न किया।
कहा जाता है कि यहां परिक्रमा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
🧳 6. यात्रा के सुझाव:
आरामदायक वस्त्र पहनें, पानी की बोतल साथ रखें।
मोबाइल और कैमरा चार्ज रखें, पर मंदिरों में फोटो न लें।
स्थानीय गाइड लेने से ऐतिहासिक जानकारी अच्छी मिलती है।
🔱 ओंकारेश्वर परिक्रमा: मांधाता पर्वत की अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा
भारत की पवित्र नदियों में से एक नर्मदा के मध्य स्थित मांधाता पर्वत या ओंकारेश्वर द्वीप परिक्रमा सिर्फ एक तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और शिव भक्ति में डूबने का एक अनुपम अनुभव है। इस परिक्रमा को करने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि यह पुण्यदायिनी भी मानी जाती है।
📍 ओंकारेश्वर कहां है?
ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है, जो नर्मदा नदी के मध्य एक द्वीप पर बसा है। यह द्वीप प्राकृतिक रूप से ॐ (ओं) के आकार में है, जो इसे अद्वितीय बनाता है। यहां स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
🚶♂️ मांधाता पर्वत परिक्रमा: एक दिव्य यात्रा
परिक्रमा की कुल लंबाई:
लगभग 7 से 9 किलोमीटर की यह परिक्रमा पहाड़ियों, सीढ़ियों, मंदिरों और घाटों से होकर गुजरती है। पूरी यात्रा में भक्त नंगे पाँव चलते हैं और शिव नाम का जाप करते हैं।
🛕 परिक्रमा मार्ग के प्रमुख स्थल:
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर – यात्रा की शुरुआत और केंद्र बिंदु।
सिद्धनाथ मंदिर – स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण।
पंचमुखी गणेश मंदिर – दुर्लभ पंचमुखी गणपति की मूर्ति।
गौमुख कुंड – जहाँ से पवित्र जल निकलता है।
काशी विश्वनाथ मंदिर – बनारस के काशी की अनुभूति।
रिंचूर मठ – आदि शंकराचार्य जी का साधना स्थल।
मांधाता गुफा – राजा मांधाता की तपस्थली।
अहिल्या गुफा – अहिल्या बाई होल्कर की आराधना स्थली।
📅 यात्रा का उत्तम समय:
श्रावण मास, माघ पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, और नर्मदा जयंती के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां एकत्र होते हैं।
सामान्यतः अक्टूबर से मार्च का समय मौसम के लिहाज से सबसे अनुकूल होता है।
🙏 परिक्रमा का धार्मिक महत्व:
मान्यता है कि मांधाता पर्वत की परिक्रमा करने से जीवन के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
यह परिक्रमा मोक्ष मार्ग का प्रतीक मानी जाती है, जिससे आत्मा को शुद्धि मिलती है।
भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए यह परिक्रमा अत्यंत फलदायी है।
🧳 यात्रा सुझाव:
आरामदायक व हल्के वस्त्र पहनें।
पानी की बोतल, टोपी, और चप्पल साथ रखें (हालाँकि भक्त नंगे पांव चलते हैं)।
वृद्ध या बीमार व्यक्तियों के लिए डोली की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
स्थानीय गाइड से ऐतिहासिक व पौराणिक जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।
✍️ निष्कर्ष:
ओंकारेश्वर परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, प्रकृति से जुड़ाव और अद्भुत अनुभवों का संगम है। यदि आप शिवभक्त हैं या जीवन में एक सकारात्मक बदलाव की तलाश में हैं, तो मांधाता पर्वत की यह परिक्रमा एक बार अवश्य करें।
🌿 "ॐ नमः शिवाय" की गूंज, नर्मदा की लहरों के साथ जब गूंजती है, तब आत्मा स्वयं शिव से जुड़ने लगती है।
ओंकारेश्वर परिक्रमा या मांधाता पर्वत की परिक्रमा - Omkareshwar Parikrama or Parikrama of Mandhata Mountain
शिव की नगरी ओमकारेश्वर बहुत ही सुंदर है। हम लोगों को यहां पर जाने का मौका मिला और हम लोगों ने यहां पर ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किये। ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करके बहुत शांति मिलती है और यह जगह बहुत ही सुंदर है। ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मांधाता पर्वत पर स्थित है। इस पर्वत के चारों तरफ से नर्मदा नदी बहती है। इस पर्वत में जाने के लिए पुल बना हुआ है। पुल से नर्मदा नदी का नजारा बहुत ही शानदार दिखाई देता है। मांधाता पर्वत में शिव भगवान जी विराजमान है और पूरे मांधाता पर्वत में बहुत सारे प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर बहुत सारे आश्रम भी बने हुए हैं, जहां पर घूमा जाता है।
ओम्कारेश्वर परिक्रमा में इन सभी जगह में घुमा जा सकता है। ओम्कारेश्वर परिक्रमा सभी उम्र के लोग करते हैं। वैसे हम लोग यहां पर ओम्कारेश्वर परिक्रमा नहीं किए थे। मगर ओम्कारेश्वर परिक्रमा का अपना महत्व है और जो भी लोग यहां पर आते हैं। वह ओम्कारेश्वर परिक्रमा जरूर करते हैं। हम लोगों ने यहां पर बूढ़े बूढ़े व्यक्ति लोगों को देखा था, जो सर पर भारी सामान लेकर ओम्कारेश्वर परिक्रमा कर रहे थे। मगर हम लोग ओम्कारेश्वर परिक्रमा नहीं कर पाए थे। मगर हम लोग ने यह तय किया है, कि अगली बार ओमकारेश्वर आएंगे, तो हम लोग ओमकारेश्वर रुककर ओम्कारेश्वर परिक्रमा करेंगे और ओमकारेश्वर के आसपास जितने भी पर्यटन स्थल हैं। वह सभी जगह हम लोग घूमेंगे।
ओंकारेश्वर इंदौर शहर से करीब 80 किलोमीटर दूर है और खंडवा शहर से 60 किलोमीटर दूर है। दोनों ही ओमकारेश्वर पहुंचने के लिए मुख्य शहर है। इन दोनों शहरों से ओम्कारेश्वर आने के लिए पक्की सड़क उपलब्ध है। अब मै आपको ओम्कारेश्वर परिक्रमा के बारे में जानकारी दूंगी। ओम्कारेश्वर परिक्रमा मार्ग करीब 7 किलोमीटर लंबा है। इस 7 किलोमीटर लंबे मार्ग में आप मांधाता पर्वत की एक जगह से परिक्रमा शुरू करते हैं और पूरे पर्वत की परिक्रमा करके, आप उसी जगह पर आ जाते हैं। मांधाता पर्वत का आकार ओम के आकार का है। इसलिए इस जगह को ओमकारेश्वर कहा जाता है। इस प्रकार से पूरे पर्वत की परिक्रमा होती है और पर्वत में जितने भी मंदिर हैं और आश्रम है। उन सभी में दर्शन करते हुए आप घूमते हैं। यहां पर बहुत सुंदर सुंदर मंदिर है, जिनमें घूमा जाता है और सभी मंदिरों का अपना अपना अलग-अलग महत्व है।
ओमकारेश्वर नर्मदा परिक्रमा में मांधाता पर्वत के अंतिम छोर पर त्रिवेणी संगम देखने मिलता है। त्रिवेणी संगम में नर्मदा नदी, कावेरी नदियों का संगम हुआ है। यह पवित्र संगम में स्नान करने से बहुत अच्छा लगता है और मन को शांति मिलती है। यहां पर मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर भगवान शिव विराजमान है। यहां पर का वातावरण बहुत शांत है और बहुत अच्छा लगता है।
ओम्कारेश्वर परिक्रमा में बहुत सारे प्राचीन मंदिर पड़ते हैं। चलिए उन प्राचीन मंदिरों में से प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बात करते हैं। ओम्कारेश्वर परिक्रमा मार्ग में मांधाता पर्वत के केंद्र बिंदु पर सबसे प्राचीन मंदिर गौरी सोमनाथ मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। गोरी सोमनाथ मंदिर मान्धाता पर्वत में सबसे ऊंचाई पर स्थित है और यह मंदिर बहुत सुंदर है। यह मंदिर पूरी तरह पत्थरों से बना हुआ है। यह मंदिर 3 मंजिला है। इस मंदिर में बहुत विशाल शिवलिंग विराजमान है। इस मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग विराजमान हैं और नंदी भगवान जी की प्रतिमा मंडप में विराजमान है। इस मंदिर के ऊपरी मंजिला में भी घूमने के लिए जाया जा सकता है। यह मंदिर बहुत ही अद्भुत लगता है। यह मंदिर ऊंचे चबूतरे के ऊपर बना हुआ है। यहां पर आकर बहुत शांति मिलती है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि, इसे पांडवों के द्वारा बनाया गया है। इस मंदिर को मामा भांजा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बहुत सुंदर है। इस मंदिर के पास ही में शिव भगवान जी की बहुत बड़ी प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं।
ओंकारेश्वर परिक्रमा मार्ग में केदारेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर शिवलिंग विराजमान है। रामकृष्ण मिशन साधना आश्रम देखने के लिए मिलता है। गायत्री मंदिर देखने के लिए मिलता है। ऋण मुक्तेश्वर मंदिर देखने के लिए मिलता है। ऋण मुक्तेश्वर मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि जो भी व्यक्ति यहां पर शिव भगवान जी के दर्शन करने के लिए आता है। उसको अपने ऋणों से मुक्ति मिलती है। ऋण मुक्तेश्वर मंदिर के आगे ही नर्मदा और कावेरी संगम घाट देखने के लिए मिलता है, जो बहुत सुंदर है। ओंकारेश्वर परिक्रमा पर राधा कृष्ण मंदिर भी देखने के लिए मिलता है। ओंकारेश्वर परिक्रमा पर हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर में हनुमान जी की, जो प्रतिमा है। वह लेटी हुई अवस्था में है। इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए बहुत सारे यात्री ओम्कारेश्वर परिक्रमा करते हैं।
ओम्कारेश्वर परिक्रमा मार्ग में सिद्धनाथ मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर भी बहुत प्राचीन है और यह मंदिर भी पूरा पत्थरों से बना हुआ है। मगर यह मंदिर अब खंडित हो गया है। मगर इस मंदिर में, जो कारीगरी की गई है। वह बहुत ही जबरदस्त है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है और इस मंदिर के बारे में भी कहा जाता है, कि यह मंदिर पांडवों के द्वारा बनाया गया है। इस मंदिर से ओम्कारेश्वर बांध का बहुत सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। इन सभी मंदिरों को देखने के बाद आप की परिक्रमा पूरी होती है और बहुत अच्छा लगता है।
ओमकारेश्वर परिक्रमा पैदल की जाती है। यह पूरी परिक्रमा मार्ग पक्का बना हुआ है, जहां से आप पैदल परिक्रमा कर सकते हैं। आपको, जहां भी लगता है, कि आप थक गए हैं। तो आप वही पर बैठ कर आराम कर सकते हैं और फिर आगे की परिक्रमा कर सकते हैं। ओम्कारेश्वर परिक्रमा को आप नर्मदा नदी में नाव के द्वारा भी कर सकते हैं। इस पूरी परिक्रमा में ओम्कारेश्वर में मांधाता पर्वत में नर्मदा नदी में एक जगह से शुरू करती है और पूरे पर्वत को चारों तरफ से घुमाकर उसी जगह पर लाकर छोड़ देती है। इस परिक्रमा में आपको नर्मदा नदी के किनारे जितने भी मंदिर रहेंगे। आप वहां पर घूम सकते है। मगर मान्धाता पर्वत के बीच में, जो मंदिर है। वहां पर आप नहीं जा पाएंगे, क्योंकि वह बहुत दूर पड़ेंगे। इसलिए यह आप पर निर्भर करता है, कि आप कौन सी परिक्रमा करना चाहते हैं। ओमकारेश्वर का पैदल परिक्रमा मार्ग में थोड़ी थकान होती है। मगर मजा भी बहुत आता है और यहां पर हर चीज के बारे में जानकारी भी मिलती है।
ओंकारेश्वर – ओंकार-मांधाता परिक्रमा
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Narmada Parikrama Omkar Mandhata Parikrama - Omkareshwar Narmade Har
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– एक ऐसा समूह जहाँ रोज़ाना कुछ नया सीखने का मौका मिलेगा।
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