जिरोती चित्रकला: निमाड़ की सांस्कृतिक धरोहर | जिरोती अमावस्या: परंपरा, महत्व और पूजन विधि | Jiroti Amavasya Puja Vidhi
🌑 जिरोती अमावस्या (Jiroti Amavasya) पर विस्तृत ब्लॉग:
🌾 जिरोती चित्रकला: निमाड़ की सांस्कृतिक धरोहर
मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल की पारंपरिक लोककलाओं में "जिरोती चित्रकला" का विशेष स्थान है। यह कला मुख्यतः ग्रामीण अंचलों में महिलाएं विशेष पर्वों व त्यौहारों पर दीवारों पर बनाती हैं। यह चित्रकला सिर्फ सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह लोक मान्यताओं, धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक समृद्धि की प्रतिनिधि है।
🎨 जिरोती चित्रकला की विशेषताएँ:
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यह कला सफेद, पीले या लाल रंगों से बनाई जाती है, अक्सर दीवारों पर गोबर और मिट्टी से बनी परत पर।
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चित्रों में मुख्यतः नाग, सूरज, चंद्रमा, तुलसी चौरा, दीपक, फूल-पत्तियां और लोक देवताओं के प्रतीक होते हैं।
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इसमें महिला और पुरुष आकृतियाँ त्रिकोणीय रूप में बनाई जाती हैं, जो आदिवासी जीवन के प्रतीक हैं।
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चित्रों में प्रतीकों का विशेष महत्व होता है — जैसे नाग देवता को परिवार की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
🔷 जिरोती अमावस्या: परंपरा, महत्व और पूजन विधि
"हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है।" ऐसी ही एक विशिष्ट अमावस्या है — जिरोती अमावस्या, जिसे कुछ क्षेत्रीय नामों से भी जाना जाता है। यह अमावस्या श्रावण मास में आती है और विशेष रूप से उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में पितृ तर्पण, दान, और धार्मिक स्नान के लिए जानी जाती है।
"जिरोती अमावस्या", जिसे "नाग अमावस्या" भी कहा जाता है, विशेष रूप से निमाड़, मालवा और आदिवासी क्षेत्रों में श्रद्धा और भक्ति से मनाई जाती है। यह दिन पितृ तर्पण, नाग पूजा और सुख-समृद्धि की कामना के लिए समर्पित होता है।
🗓️ जिरोती अमावस्या कब होती है?
जिरोती अमावस्या श्रावण (सावन) माह की अमावस्या तिथि को आती है। यह सावन का अंतिम दिन होता है और इसके अगले दिन से भाद्रपद माह प्रारंभ होता है। यह आमतौर पर जुलाई-अगस्त के बीच आता है। यह श्रावण मास की अमावस्या को आती है (सावन की अमावस्या)। यह दिन महिलाएं विशेष रूप से अपने परिवार की सुरक्षा, सुख-शांति व समृद्धि के लिए व्रत और पूजन करती हैं।
🌟 नाम का अर्थ और प्रचलन
"जिरोती" शब्द प्राचीन ग्रामीण संस्कृति से लिया गया माना जाता है, हालांकि इसका स्पष्ट शाब्दिक अर्थ कम ज्ञात है। लेकिन इसे पवित्र, तपस्वी, और तर्पण करने योग्य अमावस्या माना जाता है।
यह तिथि विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, और मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त है।
🔱 धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
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पितृ तर्पण:
जिरोती अमावस्या को पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। लोग इस दिन अपने पूर्वजों के नाम से तिलांजलि, जलदान, और पिंडदान करते हैं। -
स्नान और दान:
ब्रह्ममुहूर्त में नदी या सरोवर में स्नान करके दान देने की परंपरा है। विशेषकर, अन्न, वस्त्र, तिल, घी, और दक्षिणा दान की जाती है। -
नकारात्मक ऊर्जा का शमन:
मान्यता है कि इस दिन विशेष पूजा से नकारात्मक शक्तियाँ और कुंडली दोष समाप्त होते हैं। -
शनि और कालसर्प दोष निवारण:
कुछ लोग इस दिन विशेष शनि पूजा या कालसर्प योग निवारण पूजा भी करते हैं।
🛐 पूजन विधि (Jiroti Amavasya Puja Vidhi)
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सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, खासकर पवित्र नदी में।
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पवित्र स्थान पर दीप जलाएं और पूर्वजों का स्मरण करें।
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तिल, जल, दूध और कुश से तर्पण करें।
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ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं और दान दें।
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भगवान विष्णु और पितरों के लिए विशेष मंत्रों का जाप करें:
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"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
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"ॐ पितृभ्यो नमः"
🪔 पूजन विधि:
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प्रातःकाल स्नान कर के घर के आंगन या दीवार पर जिरोती चित्रकला बनाई जाती है।
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नाग देवता की पूजा मिट्टी या चित्र रूप में की जाती है।
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दीपक जलाकर, अक्षत, रोली, दूध, चावल, दूर्वा (घास) आदि से पूजन किया जाता है।
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महिलाएं कथा सुनती हैं, जिसमें नाग की कथा, धरती की रक्षा और देवी की कृपा का उल्लेख होता है।
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दिन भर व्रत रखा जाता है और संध्या समय प्रसाद वितरण किया जाता है।
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🍛 क्या करें इस दिन:
✅ पितरों का स्मरण करें
✅ ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराएं
✅ तिल, जल, वस्त्र और अन्न का दान करें
✅ पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं
✅ रात्रि में शांति बनाए रखें और पूजा-पाठ करें
🚫 क्या न करें:
❌ मांस-मदिरा का सेवन न करें
❌ तर्क-वितर्क और झगड़े से बचें
❌ झूठ न बोलें
❌ बुजुर्गों का अपमान न करें
📜 जिरोती अमावस्या से जुड़ी मान्यता
“जो व्यक्ति इस दिन तर्पण करता है, उसके पितृगण तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं और वंश में समृद्धि आती है।”
🌟 परंपरा और आधुनिकता
आज के डिजिटल युग में भी जिरोती चित्रकला और जिरोती अमावस्या की परंपरा जीवित है। यह न सिर्फ एक धार्मिक और सांस्कृतिक कड़ी है, बल्कि बच्चों को लोक कला और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है। कई कलाकार अब इस चित्रकला को कैनवास और फैब्रिक पर भी बना रहे हैं, जिससे इसे एक नया आयाम मिला है।
🔚 निष्कर्ष
जिरोती अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा और परिवार की समृद्धि की कामना का पर्व है। यह हमें हमारे पूर्वजों की याद दिलाती है और उनके लिए कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर देती है। इस दिन का सत्कार्य, दान, और स्मरण आपके जीवन में सुख-शांति और शुभ फल लेकर आता है।
जिरोती चित्रकला और अमावस्या सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं की वो विरासत हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती आ रही हैं। आइए हम सभी इस अमूल्य धरोहर को संजोएं और अगली पीढ़ियों को इससे परिचित कराएं।
📌 सुझाव:
यदि आप इस दिन अधिक पुण्य अर्जित करना चाहते हैं तो गायों को चारा देना, पानी पिलाना, और कुआं या जल स्रोत की सेवा भी करें। यह बहुत पुण्यदायी माना गया है।
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